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क्या धरती के नीचे भी झील होती है?

क्या धरती के नीचे भी झील होती है?

जमीन की सतह के नीचे भी पानी होता है। हम जिसे ट्यूबवेल का पानी कहते हैं वह भूगर्भीय जल है। यह पानी भी झील की शक्ल में जमा रहता है। जमीन के नीचे चट्टानों के बीच झील बन जाती है। इन्हें अँग्रेजी में एक्विफर कहते है। अनेक नदियां इन झीलों से निकलती हैं। जमीन के नीचे की इन झीलों में बरसात का और नदियों का या ग्लेशियरों का पानी जमा होता है। ऑस्ट्रेलिया में ग्रेट आटेंसियन बेसिन संभवतः दुनिया की सबसे बड़ी भूगर्भीय झील है। यह तकरीबन 17 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रों में फैली है। इसी तरह लैटिन अमेरिका का गुआरानी एक्विफर जो ब्राज़ील, अर्जेन्टीना, पैराग्वे और उरुग्वे के नीचे बना है। केंद्रीय भूगर्भीया जल बोर्ड ने भारत के भूगर्भीय झीलों की एटलस जारी की है जिसमें 14 मुख्य और 42 प्रमुख झीलों का विवरण है। अभी इनके विवरण खोजे जा रहें है। 
Tag: Keya dharti ke niche bhi jhill hoti hai? Underground lakes in hindi.

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सीसीटीवी कैमरा क्या है और कितने प्रकार की होती है?

सीसीटीवी कैमरा सावधानी एवं सुरक्षा के तौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला एक उपकरण होता है जिसका पूरा नाम होता है क्लोज सर्किट टीवी, जो किसी भी कैमरे से रिकॉर्ड हुई किसी भी चीज को देखने के लिए एक सर्किट के जरिये दर्शक तक पहुँचाया जाता है। सीसीटीवी कैमरे के प्रकार (Types of CCTV) हिडेन कैमरा (Hidden Camera) यह बॉक्स की तरह होता है। इसमें एक छोर पर लेंस के साथ आयताकार यूनिट होता है। इसका इस्तेमाल रिटेल दुकानों में ज्यादा किया जाता है। बॉक्स होने के कारण सुरक्षा कि दृष्टि से इसका इस्तेमाल ज्यादा होता है। आईटी कैमरा (IT Camera) यह डिजिटल कैमरा होता है। इसकी गुणवत्ता अन्य  एनालॉग कैमरा से 20 गुना ज्यादा होता है। इसका इस्तेमाल सभी जगहों पर होता है। बुलेट कैमरा (Bullet Camera) यह कैमरा ट्यूब की तरह होता है। इसमें सिल्वर या एल्युमिनियम शेप के कवर में लेंस होता है। इससे रिकॉर्डिंग यूनिट जुड़ा होता है। छोटा आकर होने के कारण इसे आसानी से बहार के दीवारों में लगाया जा सकता है। इसमें खासियत यह है की यह अँधेरे में भी रिकॉर्डिंग कर सकता है। डोम कैमरा (Dome Camera) इस तरह का कै...

एंटीओक्सीडेंट क्या है? What is Antioxidant in hindi

एंटीओक्सीडेंट वे अणु होते है, जो दूसरे अणुओं के ओक्सीडेशन को रोकते है। यह कोई एक पदार्थ नहीं होता है, बल्कि अनेक पदार्थ एंटी-ऑक्सीडेंट कि तरह कार्य करते है। ये विटामिन, मिनरल्स और दूसरे कई पोषक तत्व होते है। बीटा कैरोटिन, ल्यूटिन लाइकोपिन, फ्लैवोनाइड, लीगनान जैसे एंटीओक्सीडेंट हमारे लिए बहुत जरूरी और महत्वपूर्ण है। इसके अलावा मिनरल सेलेनियम भी एक एंटीओक्सीडेंट कि तरह कार्य करता है। विटामिन ए, विटामिन सी और विटामिन इ भी एंटीओक्सीडेंट के रूप में शरीर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। एंटीओक्सीडेंट का हमारे शरीर में क्या उपयोग है? हमारे शरीर में बहुत सारी क्रियाएँ होती रहती है। खाना ग्रहण करने के बाद उसका पाचन और अवशेषन होता है। मेटाबोलिज़्म में यह तय होता है कि इन पदार्थो में से कितना इस्तेमाल होगा और कितना संग्रह किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में कुछ व्यर्थ पदार्थ भी बनता है, जिन्हें शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। एंटीओक्सीडेंट उनके साथ क्रिया करके शरीर को उनसे होने वाले नकारात्मक प्रभाव से बचाते है। एंडीओक्सीडेंट कई पदार्थों में पायी जाती है, लेकिन ताजे फल और हरी सब्जियों ...

डायरिया क्या है और इससे कैसे बचें What is Diarrhea in hindi

यदि आपको दिन में तीन बार से अधिक पतला शौच हो तो यह डायरिया के लक्षण (Diarrhea ke lakchan)  होते हैं। यह बीमारी मुख्यतः रोटा वायरस के शरीर में प्रवेश से होता है। यह दो प्रकार का होता है - एक्यूट और क्रोनिक डायरिया।  डायरिया के कारक (Dairiya ke karak) :- डायरिया (Dayria) साधारणता दूषित पनि पीने से होता है। कई बार यह निम्नलिखित कारणों से भी होता है। 1. वायरल इन्फेक्शन के कारण 2. पेट में बैक्टीरिया के संक्रामण से 3. शरीर में पानी कि कमी से 4. आस-पास सफाई ठीक से न होने से डायरिया के लक्षण (Diarrhea ke laxan) :- दिन में लगातार तीन से अधिक बार पतला शौच आना डायरिया का मुख्य लक्षण है। यह साधारणता एक हफ्ते में ठीक हो जाता है। यह क्रोनिक डायरिया (Chronic Diarrhea) कहलाता है। समय पर इलाज न होने पर यह खतरनाक हो जाता है। यह ज़्यादातर बच्चों में होता है और इसमें मृत्यु का सबसे बड़ा कारण डिहाइड्रेशन होता है। पेट में तेज दर्द होना, पेट में मरोड़ होना, उल्टी आना, जल्दी जल्दी दस्त होना, बुखार होना, कमजोरी महसूस करना, आँखें धंस जाना इसके प्रमुख लक्षण हैं। डाइरिया का इलाज (D...

कृत्रिम पेसमेकर क्या है? What is Artificial Pacemaker?

कृत्रिम पेसमेकर क्या है? What is Artificial Pacemaker in hindi. कृत्रिम पेसमेकर हृदय को आवश्यक इलेक्ट्रिक पल्स देता है, जिससे नियमित रूप से हृदय की धड़कन चलती रहे। हमारे शरीर में कुछ एसी कोशिकाएँ होती है जो हमारे दृदय की धड़कनों को नियंत्रित करती है। इन्हीं कोशिकाओं को पेसमेकर कहते है। हृदय रोगियों में जब ये कोशिकाएँ ठीक से कम नहीं करती है तो हृदय को उचित धड़कन प्रदान करने के लिए कृत्रिम पेसमेकर का सहारा लिया जाता है। जैसे जैसे हमारा शरीर हरकत करता है, वैसे-वैसे हमारे हृदय की धड़कने भी बढ़ती जाती है ताकि शरीर के सभी हिस्सों को जल्द और समुचित मात्रा में रक्त मिल सके। यदि हृदय की धड़कन आवश्यकतानुसार नहीं बढ़ पाती है, तो ऐसे समय मरीज को कृत्रिम पेसमेकर लगाने की जरूरत होती है। इसके दो मुख्य भाग होते है - बैटरी और तार। बैटरी ऊर्जा प्रदान करती है तो तार उस ऊर्जा को हृदय तक पहुँचने का कम करती है। कुछ पेसमेकर एक तार वाले होते है तो कुछ दो तार वाले होते हैं। इस पेसमेकर का इंप्लांटेशन बहुत ही आसान है। इसके लिए मरीज के कंधे और गरदन के बीच एक मामूली चीरा लगाया जाता है और पेसमेकर को शरीर के अंदर...